सौर ताप प्रणाली की मदद से रामकृष्ण मिशन हर आधे घंटे में तैयार कर रहा है 650 बच्चों के लिए 120 किलो चावल

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विज्ञान के चमत्कार को हर कोई नमस्कार करता है। सूर्य की किरणों से ऊष्मीय ऊर्जा प्राप्त करने वाली सौर ताप प्रणाली भी विज्ञान का एक ऐसा ही चमत्कार है जिसे इस समय चेन्नई के वो जरूरतमंद बच्चें नमस्कार कर रहे हैं, जिन्हें इस मशीन के जरिए आसानी से भरपेट खाना उपलब्ध हो जा रहा है। जी हां, सौर ताप प्रणाली की सहायता से चेन्नई स्थित रामकृष्ण मिशन छात्रावास में हर आधे घंटे में 650 बच्चों का पेट भरने के लिए 120 किलों चावल पकाया जा रहा है।रामकृष्ण मिशन द्वारा सौर ताप प्रणाली के चलते इतने कम समय मे इतने अधिक मात्रा में बनाया का रहा खाना शहर के जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया जाता है। 109 साल पुराने रामकृष्ण मिशन द्वारा आज से 5 साल पहले 2013 में दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य की राजधानी चेन्नई स्थित अपनी शाखा में खाना बनाने के लिए जीवाश्म ईंधन की बजाय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने के लिए सौर ताप प्रणाली को विकल्प के रूप में अपनाया था। छात्रों की गृह सचिव स्वामी सत्यजननंद का कहना है, “पहले से बर्बाद सौर ऊर्जा को अच्छे उपयोग के लिए रखने से हमें संतुष्टि मिलती है।”

सौर ताप प्रणाली को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम व नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के बीच साझेदारी के माध्यम से समर्थित किया गया था, जो उद्योगों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक और परोपकारी संस्थानों की एक श्रृंखला में केंद्रित सौर ताप प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देता है। आपकों बता दें कि सौर ताप प्रणाली को कुछ इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि मशीन की सहायता से सूर्य से अधिकतम गर्मी हासिल की का सकें। सौर ताप प्रणाली में ऐसी व्यवस्था की गई है कि सूर्य से प्राप्त ऊष्मा के जरिए पानी को गर्म कर उससे भांप में तब्दील किया जाता है और फिर गर्म भांप के जरिए भोज्य पदार्थ पकाए जाते है।

यूएनडीपी और भारत सरकार एक समझौते के तहत रामकृष्ण मिशन होम जैसे संस्थानों को के द्वारा ऊर्जा के पारंपरिक साधनों की बजाय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। सरकार के इसी पहल के चलते पिछले दो वर्षों में, सौर केंद्रित हीटिंग सिस्टम की स्थापना की दर दोगुनी हो गई है। अगले तीन वर्षों में, इस परियोजना का लक्ष्य भारत भर में 45,000 वर्ग मीटर केंद्रित सौर प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों को स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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