सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पति की नौकरानी नहीं है पत्नी और अवैध संबंध अपराध नहीं

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आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में 157 साल पुराने कानून की संवैधानिकता को खत्म कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497(व्यभिचार) को असंवैधानिक करार दे दिया है। लैंगिक भेदभाव की निशानी और इसे बढ़ावा देने वाले इस कानून को समाप्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं अपने पति की नौकरानी नहीं है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमारे लोकतंत्र की खूबी ही मैं, तुम और हम में है।”अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम बातें कही। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हमारे सामाजिक तानेबाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है। क्योंकि अब तक महिला को उसके पति की संपत्ति माना जाता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि पत्नी अपने पति की नौकरानी नहीं है। इतना ही नहीं तो पहले अवैध संबंध को भारतीय कानून की किताब अपराध मानती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले के बाद पति/पत्नी ‘अपनी सहमति’ से किसी और के साथ शारिरिक संबंध बनाते है, तो अब यह अपराध की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी साफ किया कि भले ही व्यभिचार अब दंडनीय अपराध ना हो, लेकिन इसके आधार पर तलाक जरूर लिया जा सकता है। इतना ही नहीं तो अगर आपका पार्टनर किसी और के साथ आपके शारीरिक संबंध होने की बात से आहत होकर आत्महत्या कर लेता है तो इस स्थिति में आप पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा जरूर चल सकता है। तो चलिए जानते हैं कि आज 157 साल पुराने धारा 497 को खत्म करते वक्त सुप्रीम कोर्ट क्या-क्या कहा है।

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि संविधान सभी के लिए है और समानता समय की जरूरत है। -सुप्रीम कोर्ट(10.40AM)

महिला के सम्मान के खिलाफ आचरण गलत है।पति महिला का मालिक नहीं है बल्कि महिला की गरिमा सबसे ऊपर है। -सुप्रीम कोर्ट(10.45 AM)

आईपीसी 497 महिला के सम्मान के खिलाफ। महिला और पुरूष को प्राप्त हैं समान अधिकार। -सुप्रीम कोर्ट(10.48 AM)

महिला से असम्मान का व्यवहार असंवैधानिक। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर ने अडल्टरी को अपराध के दायरे से बाहर किया।  एड्रल्ट्री अपराध नहीं हो सकता है। -सुप्रीम कोर्ट(10.52AM)

सुप्रीम कोर्ट ने अडल्टरी को अपराध के दायरे से बाहर किया, आईपीसी की धारा 497 को खारिज किया। -सुप्रीम कोर्ट(11.00 AM)

शादी के बाद संबंध अपराध नहीं हैं। धारा 497 मनमानी का अधिकार देती है-सुप्रीम कोर्ट(11.05 AM)

एडल्टरी चीन, जापान, ब्राजील मेंअपराध नहीं है। कई देशों ने व्यभिचार को रद्द कर दिया है। यह पूर्णता निजता का मामला है-सुप्रीम कोर्ट(11.10 AM)

किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं-सुप्रीम कोर्ट(11.20 AM)

शादी के बाहर के संबंधों पर दोनों पर पति और पत्नी का बराबर अधिकार-सुप्रीम कोर्ट(11.15 AM)

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