रामजी का नाम भी ना बचा पाया बी आर आंबेडकर की मूर्ति

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भारत में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। हर दिन देश के किसी न किसी कोने से ऐसी खबर आती है जो समाज के बुनियादी ढांचे को तोड़ने और देश के माहौल को खराब करने की मकसद से की जाती है। इनमें से एक है हाल के दिनों से जारी मूर्तियों को तोड़ने का सिलसिला। त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने के बाद मूर्तियों को तोड़े जाने का कारवां थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश में बी आर आंबेडकर की मूर्ति तोड़ने की बात सामने आ रही है। यह तब भी हो रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ऐसे मामलों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है।

सिद्धार्थनगर और आजमगढ़ के बाद अब इलाहाबाद से सामने आया मूर्ति तोड़ने का मामला

इसके बावजूद मूर्ति तोड़े जाने का ताजा मामला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से सामने आया है। यहां असामाजिक तत्वों ने संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया है। इलाहाबाद के त्रिवेणीपुरम के झूंसी स्थित आंबेडकर की मूर्ति के सिर को धड़ से अलग कर दिया गया है। इतना ही नहीं असामाजिक तत्वों द्वारा मूर्ति के चबूतरे को भी नुकसान पहुंचाया गया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के ही सिद्धार्थनगर और आजमगढ़ में बी आर आंबेडकर की मूर्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई थी।

कांग्रेस ने 1992 में जारी किया था भीमराव रामजी आंबेडकर के नाम से डाक टिकट

 

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश से बी. आर. आंबेडकर की मूर्तियों को तोड़ने का यह सिलसिला तब सामने आ रहा है जब हाल ही में प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने बी आर आंबेडकर के नाम के मध्य में “रामजी” शब्द के इस्तेमाल की बात कही है। सरकार द्वारा सभी सरकारी दस्तावेजों पर बी आर आंबेडकर के नाम को आधिकारिक रूप से भीमराव रामजी आंबेडकर करने का ऐलान किया गया। जिसके बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल सी मच गई। विपक्ष ने जहां इसे राजनीतिक स्वार्थ की प्राप्ति हेतु उठाया गया कदम बताया वहीं सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने 1992 में कांग्रेस द्वारा जारी डाक टिकट पर आंबेडकर के नाम के साथ इस्तेमाल किए गए रामजी शब्द का हवाला देकर अपना पक्ष रखा।

असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने की जरुरत

सवाल यह उठता है कि एक तरफ लोग आंबेडकर के नाम के साथ रामजी जोड़ने को लेकर हो हल्ला मचाए हुए हैं तो दूसरी तरफ उसी आंबेडकर की मूर्तियों के साथ आए दिन तोड़-फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार आंबेडकर के नाम को लेकर जितनी सक्रिय दिख रही है उतनी ही तत्पर वह आंबेडकर के मूर्तियों को उपद्रवियों से बचाने के मामले में क्यों नजर नहीं आ रही है? जरूरी है कि सरकार ऐसे मामलों में सख्ती दिखाए और इन मामलों से जुड़े असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर सामाजिक समरसता को जल्द से जल्द कायम करे।

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