राजस्थान सरकार ने तीन मुस्लिम नाम वाले गांवों के नाम बदलकर रखे हिंदू नाम

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मेरे देश के हालात बदले न बदले लेकिन देश के कई इलाकों का आजकल नाम जरूर बदल रहा है। पहले हरियाणा के गुड़गांव को गुरुग्राम कर दिया गया फिर उत्तरप्रदेश के मुगलसराय को पंडित दीनदयाल उपाध्याय में तब्दील किया गया। और अब इस कड़ी में अगला नंबर राजस्थान के तीन गांवों का का है। यहां राजस्थान सरकार मुस्लिम नाम वाले गांवों के नाम बदलकर गांव का हिंदू नाम रख रही है। गांवों के नाम बदलने को लेकर विपक्ष का आरोप है कि सरकार से जब कोई काम नही हो रहा तो वह अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए नाम बदलने के काम मे जुट गई है।
इसी साल के अंत मे राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्दे नजर राजस्थान सरकार ने संबंधित गांववालों की मांग को लेकर तीन गांवों के नाम बदलने का फैसला लिया हैं। जिन तीन गांवों के नाम बदले गए है उनमें मियां का बाड़ा, इस्माइल खुर्द और नरपाडा का नाम शामिल है। मियां का बाड़ा नाम सुनने में भले मुस्लिम लगे लेकिन इस गांव में रहने वाले लगभग 2000 लोगों में से 80% आबादी हिंदुओ की ही है। यही वजह रही कि ‘मियां का बाड़ा’ का नाम बदलकर ‘महेश नगर’ कर दिया गया। जिसकी मांग गांववालें सालों से कर रहे थे।
दरअसल, गांववालों का ऐसा मानना है कि गांव का मुस्लिम नाम होने की वजह से उनके बच्चों की शादियों में तमाम तरह की दिक्कतें आती हैं। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सटे बाड़मेर जिले में स्थित मियां का बाड़ा गांव एक समय गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक था। उस समय गांव में सभी धर्म और संप्रदाय के लोग रहा करते थे। लेकिन इधर गांव में हिंदुओं की बढ़ती बहुलता और मुस्लिमों की अल्प जनसंख्या को देखते हुए गांव वालों की सरकार से मांग थी कि उनके गांव का मुस्लिम नाम बदलकर उसे कोई हिंदू नाम दे दिया जाए।
बाड़मेर जिले के मियां का बाड़ा गांव के अलावा झुंझुनू जिले के इस्माइल खुर्द और जालौर जिले के नर पाड़ा का भी नाम बदला गया है। जहां मियां का बाड़ा का नाम बदलकर हिंदू भगवान शिवजी के नाम ‘महेश’ पर महेश नगर रखा गया। वहीं इस्माइल खुर्द का नाम बदलकर पिचनवा खुर्द और नरपाड़ा का नाम बदलकर नरपुरा रख दिया गया। गौरतलब है कि गांवों के नाम बदलने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने एनओसी के लिए रेल मंत्रालय, भारतीय डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भेजा था। इन तीनों विभागों द्वारा नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाने के बाद गृह मंत्रालय ने तीनों गांवों के नाम बदल दिए।

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