मोदी सरकार के इस फैसले के बाद दलित छात्रावास के लिए किसी NGO को नहीं मिलेगा एक रुपया

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मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब सरकार दलित छात्रावास बनाने के लिए किसी भी एनजीओ और निजी संस्थानों को एक रूपए की भी सहायता राशी नहीं जारी करेगी। इससे पहले दलित छात्रावास के निर्माण के लिए सरकार ऐसे एनजीओ और निजी संस्थानों की शत प्रतिशत मदद किया करती थी। दलितों के शैक्षणिक स्तर को उठाने के लिए साल 1989 में भारत सरकार ने दलित छात्रों के लिए विशेष छात्रावास बनाने वाले एनजीओ और निजी संस्थाओ की शत प्रतिशत आर्थिक मदद करने की योजना की शुरुआत की थी।  इस सरकारी नीति के तहत  दलित छात्रावास बनाने के लिए सरकार की ओर से प्रति सीट तीन लाख रुपए दिए जाते थे, वहीं उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों को प्रति सीट साढ़े तीन लाख रुपए आवंटित किए जाते थे। लेकिन अब जब सरकार ने तीन दशक पुरानी नीति को बदल या फिर कहें कि समाप्त कर दिया है, तो अब दलित छात्रावास बनाने के लिए एनजीओ और निजी संस्थानों को सरकार की तरफ से एक पैसे की सहायता नहीं की जाएगी।
पहली नजर में सरकार का यह फैलसा दलित विरोधी नजर प्रतीत होता है और इस बात की आशंका भी बहुत ज्यादा है कि विपक्षी दलों के लोग सरकार के इस कदम को दलित विरोध बताकर सरकार को घेरने का भी काम करें। लेकिन सरकार का यह दावा है कि उसके इस कदम से दलित छात्रों का नहीं बल्कि दलित बच्चों के नाम पर सरकार से सहायता राशि प्राप्त अपनी जेब गर्म करने वाले एनजीओ चालकों का होगा। दरअसल, एक लंबे समय से सरकार के पास यह शिकायत आ रहीं थी कि दलित छात्रावास के नाम सरकार से पैसे लेकर बनाए छात्रावास का इस्तेमाल एनजीओ चालक व्यावसायिक फायदे के लिए निजी रूप से कर रहे हैं। इतना ही नहीं तो सरकार के पास पहुंची इस तरह की शिकायतों में बड़ी संख्या में निजी शैक्षणिक संस्थान भी थे। जिन्होंने सरकार से दलित छात्रावास बनाने के लिए नाम पर पैसा लिया और बाद में वह इसका इस्तेमाल व्यवसायिक रुप से कालेज छात्रावास के रुप में करने लगे थे।
दलित छात्रावास से जुडी इन अनियमितावों की शिकायतों के बीच जब बिहार के मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के देवरिया जैसी घटनाओं सहित देश भर से इस तरह के छात्रावासों में घट रही गलत घटनाएं प्रकाश में आई तब सरकार ने यह कड़ा कदम उठाने की सोची। तीन दशक पुराणी नीति को खत्म कर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की नई नीति के तहत दलितों के लिए छात्रावास बनाने के लिए पैसा अब सिर्फ सरकारी संस्थानों को ही दिया जाएगा। राज्यों को भी इस नई नीति का मसौदा भेज दिया गया है। साथ ही निर्देश दिया है कि वह अब नई नीति के तहत ही कोई प्रस्ताव भेजें। योजना के तहत ऐसे छात्रावास उन सभी ब्लाकों में ही खोले जा सकते है, जहां दलितों की आबादी 20 फीसद या उससे अधिक हो। सरकार ने इसके अलावा नई नीति के तहत पहले से स्थापित ऐसे सभी छात्रावासों की सलाना ऑडिट कराने का भी व्यवस्था तय की है।

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