में कुछ नहीं भुला हु – गाँधी सुभाष

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संसद में मुद्दा जेरे बहस था .. चीन द्वारा भारतीय ‘सरजमीं पर कब्ज़ा कर लेने का .. पंडित नेहरू ने गैर जिम्मेदाराना लहजे में कहा .. उस जमीं पर घास का तिनका भी ‘नहीं उगता ..!! उनके इस वक्तव्य पर कांग्रेस के सांसद महावीर त्यागी ने अपने गंजे सिर से गांधी टोपी उतारते हुए पूछा – ‘मेरे सिर पर एक भी बाल नहीं है और न उगने की ‘संभावना तो क्या इसे काटकर फेंक देना चाहिए !”

नेहरू के पास जमीं में ‘चितवन’ गड़ा लेने के कोई और जवाब नहीं था .. अनन्तः 1962 की जंग हुई .. भारत को शिकस्त से रूबरू होना पड़ा .. कवि प्रदीप ने ए मेरे वतन के लोगो लिखा लता ने 1 जनवरी, 1963 को शहीदों के सम्मान ‘में जब इसे लयबद्ध किया तो सबसे ज्यादा फफक फफककर रोने वालों में नेहरू ही शुमार थे .. !!

जब जब शहादत का जिक्र हुआ .. कवि प्रदीप के शब्द जीवंत बन पड़े .. 1965, 1971 और 1999 कभी नहीं भूले हम इस देश की शहादत को .. पर जिस कलाम ने विजन 20 – 20 को लक्ष्य करके जिस युवा के बूते 21वीं सदी में भारत के विकसित होने के ख्वाब बुने .. वह 2016 के जेएनयू .. ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे .. 2017 के रामजस कॉलेज .. ”पाकिस्तान नहीं युद्ध’ की तख्तियां लेकर राष्ट्रीय अस्मिता को रौंदने वालों की ‘पीठ सहला -ते नज़र आए .. !! लालबहादुर का जय जवान .. गली का गुंडा हिटलर .. मुसोलिनी और बलात्कारियों के खिताब से नामित किए गया .. सरहद की कुर्बानियाँ फीकी नज़र आई .. बुरहान याकूब, मकबूल, अफजल .. पोस्टर बॉय हो गए .. और इनके समर्थन में उठी आवाज़ें .. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो गई .. भान रहे कि 1984 में भिंडरांवाला और बाद में पंजाब और असम में आतंकवाद का सफाया ‘किया गया था और उनकी पाकिस्तान परस्ती और अलगाववाद को कभी भी अभिव्यक्ति नहीं कहा गया .. जबकि संविधान में यह अनुच्छेद तब भी था !

2016 के उत्तरार्द्ध में सर्जिकल स्ट्राइक हुआ … ‘सर्वदलीय बैठक हुई ..एकजुटता की बात बैठक में नज़र आई .. पर जिस आशंका का भय था वही हुआ .. कमरे से बाहर ‘आते ही सेना के पराक्रम पर कांग्रेस के प्रवक्ताओं और दिल्ली के ‘मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा पेट पीटा ..किसी ने इसे फेक करार दिया किसी ने सबूत माँगे .. पर अब जब सबूत सामने रख दिए तो निरुपम को सुरक्षा पर आघात लग रहा है ..सुरजेवाला को सेना के शौर्य का राजनीतिक लाभ नज़र आ रहा है और केजरी मौन व्रत पर है .. !!

सुरजेवाला ज्ञान बघार रहे हैं .. सर्जिकल स्ट्राइक तो सेना ने किया .. मोदी और भाजपा को किस बात का श्रेय .. चलो मान भी लें पर उस गांधी जीका श्रेय कांग्रेस क्यों लेती रही है जिसने देश की आज़ादी के बाद कांग्रेस को राजनीतिक दल न बनाने की बात कही थी ..!! .. जब जब भी विपक्ष ने 60 साल में कुछ भी न करने का आरोप लगाया तो आपने भाखड़ाबांध से लेकर संचार क्रांति तक को क्यों गिनवाया .. जबकि काम तो मजदूरों राजमिस्त्रियों, इंजीनियरों .. कर्मचारियों .. ने किया है .. सड़क अस्पताल से लेकर रेलवे लाइन, खाद्यान ..चिकित्सा.. परिवहन में किसी राजनेता ने कब बठल .. कुदाल .. औजार उठाए हैं फिर आप किस उपलब्धि की शेखी बघारते हैं .. ?? और जब नेतृत्व की जरूरत ही नहीं तो आप किस नाम पर वोट मांगने आते हैं ?

पर अफसोस हम देश के नागरिक न रहकर पार्टियों के वोटबैंक मात्र हो चुके हैं .. और यही इस देश का दुर्भाग्य है कि कर्तव्यों का पालन न करने वाले अधिकारों की कुर्सी पर जा बैठे हैं !!

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हाल ही में महिलाओं की सुरक्षा पर एक रिपोर्ट आती है .. बेहद चौंकाने वाली ..जिसमें भारत सीरिया से भी निचले पायदान पर दर्शाया गया है .. हम यहां भी पक्ष विपक्ष .. मजहबी जातीयता के आँसू बहाकर इतिश्री मान लेते हैं .. न कि ‘समस्या के निदान तक पहुंचने का हमारा संकल्प है .. !!

प्रदीप पुनः याद आते हैं..डरती है ये पांव की पायल आज कहीं हो जाए न घायल .. रोती है सलमा .. रोती है सीता .. रोती है कुरान ओ गीता .. आज तो बहनों पर भी हमला होता है … दूर किसी कोने में मजहब रोता है .. पर अफसोस हमारे लिए गीता और आसिफा के अलग अलग मायने है ..कठुआ और मन्दसौर हमारे लिए जुदा जुदा सी पहेली है .. !!

न मैं जेसिका कांड भूला हूँ .. न नैना शाहनी .. न भंवरी देवी और न इसके पीछे की राजनीतिक गंदगी को .. न ही शिवानी भटनागर को भूला हूँ .. न ही रुचिका गिरोत्रा को .. और न ही इस भूमिका में नामजद पुलिस प्रमुखों को ( शंभू प्रताप और रविकांत ) .. न ही लिफ्ट में प्रताड़ित पत्रकार को और न ही इसके मुजरिम तरुण तेजपाल को .. न ही डेरे की दीवारों में घुटती साध्वियों की आवाजों को और न ही कथित बलात्कारी राम रहीम को .. न आसाराम जैसे धर्म की आड़ में पनपने वाले अय्यास को .. !!

बहुत बेहतर से याद है .. फूलन .. और ‘उसको रौंदने वाली एक जातीय मानसिकता .. हेतल पारेख .. अरुणाशानबाग .. ज्योति सिंह ( निर्भया ) .. किरोड़ीमल कॉलेज की मेडिकल वह छात्रा किंवदन्तियों की मौत में घिरी नूपुर तलवार .. शिवानी जडेजा सोनाली बेनर्जी .. पूनम राठी .. वगैरह वगैरह .. !!

बहुत बेहतर ढंग से याद है जहानाबाद, रामपुर और कैमूर जहां दिन दहाड़े बेटियों को निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया गया और वे भैया कह कहकर ऐसा न करने की दुहाई देती रही !!

याद है कठुआ .. साहिबाबाद .. सूरत .. सासाराम .. रोहतक अमेठी और मंदसौर की बच्चियाँ .. और बरपती हैवानियत पर दुखद हम इनमें से एक को लेकर शर्मिदा होते हैं और बाकी पर चुप्पी साध लेते हैं .. !!

क्योंकि हम या तो अंध भक्त है या अंध ‘वोटर .. सच्चे नागरिक का चोला 21 वीं सदी में हम उतार चुके हैं .. हमारे दुल्ला भट्टी और हुमायूँ कहीं खो गए हैं .. जो मजहब क्षेत्र दल को भूलकर नारी अस्मिता की कद्र करना सीखा सके .. !!

आखिर सोनोग्राफी और कन्याभ्रूण हत्या से बचाकर यूं ही बेटी की अस्मत को नीलाम होते देखते रहना ही ‘हमारी प्राथमिकता है .. तो फिर कहीं बेहतर नहीं कि वे गर्भ में ही मर जाए .. !!

क्या शासन प्रशासन लाचार हो चुका है .. या मानवाधिकार एंव नाबालिग के झंडे लेकर हम इन दरिंदों को बचाने फिर चले आएंगे .. या फिर इंतज़ार है किसी के फूलन बनने का या ‘पिता फ़िल्म के बेबस बाप की तरह बेटी की अस्मत का इंतकाम ले कर जहर खाकर मरने की बेबसी का .. !!

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