महात्मा गांधी के जन्मदिन पर लाल बहादुर शास्त्री जी के किसानों के साथ जवानों ने की हिंसा

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आज के दिन को विरोधाभास दिवस घोषित कर दिया जाना चाहिए। क्यों? क्योंकि आज यानी 2 अक्टूबर को एक तरफ देश महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म दिन मना रहा है। और दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली में किसान अपनी मांगों और पुलिस के जवान सरकार के आदेशों के चलते एक-दूसरे के विरूद्ध हिंसा पर उतर आए।

Image may contain: one or more people, people standing and people sittingकहने का मतलब आज के दिन देशभर में लोग अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा गांधी और जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी का संयुक्त रूप से जयंती मना रहा है। उसी देश मे उसी दिन देश की राजधानी दिल्ली में जवान और किसान दोनों आपस मे हिंसा करने पर उतारू हो गए है।Image may contain: crowd and outdoorअब ऐसी स्थिति में आज के दिन को विरोधाभास दिवस ना घोषित किया जाए तो क्या किया जाए? सरकार और प्रशासन दोनों को इस बात की जानकारी थी कि अपनी मांगों को लेकर 23 सिंतबर को शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रवेश करेगा।

Image may contain: one or more people and outdoorइसके बावजूद सरकार की तरफ से किसानों की मांगों पर तब तक गंभीरता से विचार नहीं किया गया जब तक किसान 200-250 किलोमीटर दिल्ली तक नहीं पहुंच गया। खबर लिखें जाने तक किसानों की आधी बातें मान ली गई थी, लेकिन सवाल वही उठता है कि इसके लिए किसानों को पैदल चलकर दिल्ली तक क्यों आना पड़ा?

इतना ही नहीं, जैसे-तैसे जब किसान पैदल चलकर किसान दिल्ली के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो सरकार बजाय किसान से बातचीत करने के उसपर लाठी-डंडे से हमला किया। किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए उनपर ना सिर्फ पानी की बौछार की गई बल्कि पुलिस बल के द्वारा रबर की गोलियां भी चलाईं गई।
तस्वीरों में आप देख सकतें है कि कैसे बुजुर्ग किसानों पर पुलिस बल ने लाठीचार्ज कर उन्हें लहूलुहान कर दिया है। ना सिर्फ किसानों के शरीर पर बेरहमी से चोट किया गया बल्कि किसानों की आमदनी में अहम भूमिका निभाने वाले उनके ट्रैक्टरों को भी पुलिस द्वारा तोड़ दिया गया। किसानों पर हिंसा का यह काम अहिंसा की बात करने वाले महात्मा गांधी और किसानों की बात करने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिन पर हुआ।
~रोशन ‘सास्तिक’

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