भूखे पेट सोया…अँधेरे में अकेले रोया…फुटपाथ पर पानी पूरी बेची….और U-19 एशिया कप में बन गया मैन ऑफ़ दी टूर्नामेंट

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अगर कोई काम हम दिल से नही करना चाहते हैं तो उसे करने के लिए हजार ‘बहाने’ ढूंढ लेते हैं। लेकिन अगर वही काम हम सच में करना चाहते हैं तो उसे करने के लिए हजार ‘कारण’ ढूंढ लेते है। भारत की अंडर-19 टीम में सलेक्ट होने वाले यशस्वी जयसवाल ने भी कभी गरीबी को अपने सपने के सफ़र से मुंह मोड़ लेने का बहाना नही बनाया बल्कि उन्होंने अपने सपनों को सच करने के लिए अपने अंदर के हुनर और जुनून को बहाना बनाया। गरीबी की जिन तंग और बदहाल गलियों से यशस्वी गुजरें है, उस रास्ते से भारत की अंडर-19 टीम में जगह बनाना और फिर अंडर-19 एशिया कप में सर्वाधिक 214 बनाकर ‘मैन ऑफ़ दी टूर्नामेंट का ख़िताब जीत लेने का सफर हकीकत कम और जादुई ज्यादा है। चलिए जानते है भदोही से भारतीय टीम तक यशस्वी जयसवाल द्वारा तय किये गए उनके जादुई सफ़र के बारे में। yashasvi jaiswal yashasvi jaiswal yashasvi jaiswal

भदोही के रहने वाले यशस्वी एक बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं। शुरू में वह दुकान पर काम करते थे। जिससे उनका घर चलता था। लेकिन फिर अपने सपनों को पूरा करने के लिए यशस्वी जयसवाल मुंबई चले आए। यशस्वी मुंबई तो चले आए लेकिन मुंबई में आगे का समय उनके लिए उनकी कल्पना से भी ज्यादा भयवाह साबित होने वाला था। इसकी शुरुआत भी उनके मुंबई में कदम रखते ही हो गई थी। उन्हें उनके अंकल ने अपने घर मे जगह की कमी का हवाला देकर रहने नही दिया। जिसके बाद वह एक डेयरी में रहने लगे। लेकिन डेयरी में भी उन्हें ज्यादा समय तक रहने नही दिया। यशस्वी बताते है कि एक दिन जब वह क्रिकेट खेलकर डेयरी लौटे तो उनका समान डेयरी के बाहर फेंक दिया गया था। yashasvi jaiswal yashasvi jaiswal yashasvi jaiswal

सिर से छत छीन जाने के बाद भी यशस्वी जयसवाल ने हार नही मानी। इसके बाद उन्होंने मुस्लिम यूनाइटेड क्लब की मदद से टेंट में रहना शुरू कर दिया। लेकिन इसका यह कतई मतलब नही की इसके बाद यशस्वी की जिंदगी आसान हो गई। उनकी राह में अब भी हजारों कांटे थे जिनपर उन्हें चलना भी था और वो भी नंगे पैर। भदोही से यशस्वी के पिता उसके खर्चे के लिए समय-समय पर पैसे तो भेज दिया करते थे। लेकिन मुम्बई जैसे महंगे शहर में उतने पैसे नाकाफ़ी थे। जिसके चलते यशस्वी दिन के दो वक्त का खाना तो खा लेता था लेकिन नाश्ता करना उसके कूवत के बाहर की चीज थी। कभी दिन इतने खराब होते कि उसे भूखे पेट भी सोना पड़ता था। yashasvi jaiswal

पैसों के लिए कभी पानी पूरी बेचने तक को मजबूर हुए यशस्वी जयसवाल इस अपने संघर्ष की कहानी के बारे में बताए हुए कहा,” ‘राम लीला के दौरान में अच्छा कमा लेता था। लेकिन मैं नहीं चाहता था कि कभी मेरे टीम मेट्स पानी पुरी खाने मेरे यहां आए। कभी आते थे तो मेरा मन करता था कि उन्हें अच्छे से सर्व न करूं।’ यशस्वी के कहा,” वह जहां रहते थे वहां कोई टॉयलेट भी नहीं था। वो टॉयलेट करने के लिए फैशन स्ट्रीट में जाते थे। क्योंकि रात को वो बंद हो जाता है।” यशस्वी के अनुसार टेंट में लाइट न होने पर उन्हें अँधेरे में ही खाना पड़ता था। ऐसे वक्त में वह अपने परिवार को याद कर खूब रोया भी करते थे। yashasvi jaiswal i yashasvi jaiswal yashasvi jaiswal

मुंबई अंडर-19 के कोच सतीष समंत ने यशस्वी की तारीफ में कहा,”वो गेंदबाजों के दिमाग को पढ़कर शॉट्स खेलता है। अंडर-19 में उसने बहुत जल्दी जगह बना ली। वो ऐसे शॉट्स खेलता है जो कोई नहीं खेल सकता। उसके पास कुछ नहीं है। न स्मार्टफोन न वाट्सऐप. जबकी सभी बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। वो मुंबई का आने वाला बड़ा प्लेयर साबित होगा।” यशस्वी कहते हैं, “आप क्रिकेट में मेंटल प्रेशर की बात करते हैं? मैं रोज अपनी लाइफ में प्रेशर झेलता हूं। जिसने में सख्त बना दिया है। मुझे पता है मैं रन बना सकता हूं और विकेट भी ले सकता हूं। शुरुआत में काफी बेशर्म था। मैं जब टीम मेट्स के साथ लंच पर जाया करता था तो उस वक्त मेरी जेब में पैसे नहीं रहते थे। मैं उनसे कहता था- ”मेरे पास पैसा नहीं और भूख है।”  yashasvi jaiswal  yashasvi jaiswal yashasvi jaiswal  yashasvi jaiswal  yashasvi jaiswal  yashasvi jaiswal

~ रोशन ‘सास्तिक’

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