भारत का एक ऐसा गाँव जहाँ भारत का कानून लागू नहीं होता

684

हिमाचल प्रदेश का नाम सुनते ही हमारे आँखों के सामने तमाम मनमोहक प्राकृतिक दृश्य उभरने लगते हैं। मन करता है कि किसी तरह अगले ही पल वहां पहुँच जाएं। कई लोग हिमाचल प्रदेश की वादियों की सैर कर आए होंगे। ज्यादातर लोगों ने पूरा हिमाचल ना सही लेकिन हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल घूम लिए होंगे।

लेकिन हिमाचल प्रदेश में सिर्फ सफ़ेद बर्फ से ढंके हिमालय और वादियों से कल कल बहती नदियां ही नहीं बल्कि एक ऐसा गाँव भी है जिसके बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। भारत के अन्य गांवों से एकदम अलग इस गाँव से जुड़ी अजीबोगरीब बातें पता लगते ही इस बात की संभावना बहुत ज्यादा है कि अब अगर आप दोबारा कभी हिमाचल गए तो सबसे पहले इसी गाँव को जाकर देखना पसंद करेंगे।

आखिर कौन-सा है यह गांव और क्या है इसकी खासियत जो इसे भारत के अन्य गांवों से अलग कर इतना अनोखा बनाती है? तो अब तक हमने जिस गाँव के बारे में तारीफों के इतने पुल बांधे हैं उस गाँव का नाम है मालणा। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अति दुर्गम इलाके में स्थित यह गाँव भारत के सबसे रहस्यमयी इलाकों में आता है। इस गाँव की सबसे अनोखी बात यह है कि इस गाँव के अपने कानून हैं। यानी इस गाँव में कोई भी काम गाँव के लोगों द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ही होता है न कि भारत सरकार द्वारा लागू किये गए नियमों के अनुसार। जितने सीधे तरीके से यह बात कह दी गई है बात उतनी सीधी नहीं है, क्यों? यह आपको आगे पढ़कर पता चलेगा।

मालणा गाँव की हैरान कर देने वाली दिलचस्प जानकारियाँ 

सबसे अनूठा गांव 

समुद्र की सतह से करीब 12,000 फुट ऊंचाई पर बसे इस गाँव में महज 4,700 के आसपास लोग ही रहते हैं। इस गांव के लोग खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं। आपको यह जानकर बहुत ज्यादा हैरानी होगी कि मालणा भारत का एकलौता ऐसा गाँव है जहां मुगल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है। वैसे तो यही दो चीजें इस गाँव को भारत का सबसे अनूठा गाँव घोषित करने के लिए काफी हैं, लेकिन अभी ऐसे और भी ढेर सारे अजीबोगरीब और हैरान करने वाले रोचक तथ्य जुड़े हैं इस गाँव के साथ। जिनके बारे में आप जैसे-जैसे जानते जाएंगे वैसे-वैसे दांतों तले अपनी उँगलियाँ दबाते जाएंगे। तो चलिए जानते हैं इस गाँव से जुड़ी कुछ और अविश्वसनीय बातें।

बिना इजाज़त के कुछ छू नहीं सकते आप 

आज जहां हर कोई अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यटकों की सुविधा हेतु नियम-कानून में ढिलाई बरतता है। वहीं हिमाचल का मालणा गाँव पर्यटकों को लेकर अपनी सख़्ती के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले पर्यटकों को किसी भी स्थान पर जाने या किसी भी स्थान को छूने से पहले बेहद सावधान रहकर उसके आसपास दी गई सूचनाओं को सावधानीपूर्वक पढ़ना पड़ता है। क्योंकि अगर आपने यहां जाने-अनजाने में कोई नियम तोड़ा तो आपको भारी  जुर्माने के साथ-साथ कठोर दंड भी भुगतना पड़ सकता है।

सजा के तौर पर नौकरी 

यहां का कोई भी कानून तोड़ने पर यदि पयर्टक आर्थिक जुर्माना देने में सक्षम नहीं हो पाता है तो उसे यहां के राजा के यहां कुछ दिनों के लिए नौकर बनकर रहना पड़ता है। इस गाँव में कुल 6 ऐसे स्थान हैं जिन्हें छूने को लेकर मनाही है। इनमे से कुछ स्थान तो ऐसे हैं जिन्हें खुद गाँव वाले तक नहीं छू सकते। जिसके पीछे यह वजह बताई जाती है कि इन कानूनों के पालन ना होने पर दैवीय प्रकोप का डर रहता है। स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि अगर पर्यटक बिना अनुमति के वर्जित स्थलों को स्पर्श करते हैं तो उससे देवता के नाराज होने का खतरा बना रहता है। बताया जाता है कि साल 2006 और 2008 में ऐसे ही किसी कारणवश पूरा गाँव आग की चपेट में आकर तबाह हो गया था। इस घटना के बाद से गाँव वालों ने पर्यटकों के लिए बनाए नियम और ज्यादा सख्त कर दिए।

खुद का संविधान

इस गाँव का अपना राजा ही नहीं बल्कि अपनी एक अलग सरकार भी है। इनका अपना संसद है, जिसमें उच्च सदन और निम्न सदन दोनों हैं। राजा और संसद के साथ-साथ इस गाँव का भारत से अलग अपना संविधान भी है। न्याय की किताब ही नहीं बल्कि इस गाँव में न्याय करने की पद्धति भी सर्वथा अलग है। इन सबसे इतर सबसे अनूठी बात यह है कि इस गांव पर सरकार और पुलिस की बजाय गाँव वालों का सामूहिक शासन चलता है।

चलते-चलते आपको बताते चलें कि यह भारत ही नहीं बल्कि शायद दुनियाभर में इकलौता ऐसा पर्यटक गाँव होगा जहां के स्थानीय अपने घरों पर सैलानियों को ठहरा नहीं सकते हैं। ऐसा करते हुए पकड़े जाने की स्थिति में अपराधी को कड़े से कड़ा दंड भुगतना पड़ता है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here