पढ़िए सोशल मीडिया पर वायरल ओडिशा के इस तस्वीर की क्या है हकीकत

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पढ़िए सोशल मीडिया पर वायरल ओडिशा के इस तस्वीर की क्या है हकीकत
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक मृतक महिला के शव को साइकल पर बांधकर ले जाते शख्स की तस्वीर बहुत ज्यादा शेयर की जा रही है। सोशल मीडिया पर हर दूसरा-तीसरा शख्स इस फोटो को मार्मिक कैप्शन के साथ अपने टाइमलाइन पर जगह दे रहा है। यह फोटो अपने आप मे एक बड़ी समस्या की तरफ ध्यान आकर्षित कर रही है। लेकिन इसके अलावा भी एक समस्या है जो इस फोटो से जुड़ी है। समस्या यह कि इस फ़ोटो की हकीकत क्या है?
हजार मुंह हजार बात की तरह यहां भी इस फ़ोटो को लेकर अलग-अलग लोग अलग-अलग कहानी बयान कर रहे है। कोई साइकिल पर लदी मृतक महिला को उसे ढो कर ले जा रहे व्यक्ति की पत्नी बता रहा है, तो की कोई कुछ और रिश्ता जोड़ रहा है। वहीं ज्यादातर लोग इसे अस्पताल से एम्ब्युलेंस न मिलने के चलते मजबूरी में शव को साइकिल पर लादकर घर से अस्पताल या अस्पताल से घर ले जाने की दर्दनाक घटना करार दे रहे हैं। लेकिन सच क्या है?
तो चलिए आज हम आपको सोशल मीडिया पर सैकड़ो अलग-अलग कहानियों के साथ विचरण करते इस एक फ़ोटो की असली कहानी बताते हैं। भारत में सामाजिक कुरूपता का हाल बयां करती यह तस्वीर ओडिशा  के बौद्ध जिले के कृष्णपाली गांव की है। इस तस्वीर में नजर आ रही मृतक महिला का नाम पंचा महाकुड़ है। जिसकी उम्र 40 साल बताई जा रही है। वहीं तस्वीर में नजर आ रहे व्यक्ति का नाम चतुरभुज बांका(55 वर्षीय) है। और मृतक महिला रिश्ते में उसकी साली लगती है।
चतुरभुज अपनी साली की लाश को साइकिल पर लादकर ना अस्पताल से गघर ला रहा है औऱ ना ही घर से अस्पताल ही ले जा रहा है। असल में पंचा महाकुड़ नामक उस महिला की मौत हो जाने के बाद सरकारी सहायता के तहत उसके शव को एम्ब्युलेंस जरिए उसके घर पहुंचा दिया गया था। लेकिन गांव वालों की तरफ से महिला के अंतिम संस्कार में किसी तरह की कोई सहायता न मिलने की वजह से चतुरभुज अपनी साली को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए उसके शव को साइकिल पर लादकर ले जाने के लिए मजबूर हो गया।
अब यहां आपके मन में दो सवाल और खड़े हो सकते हैं कि गांव वालों ने चतुरभुज के साथ इतना अमानवीय व्यवहार क्यों किया। और अगर मृतक महिला चतुरभुज की साली है तो फिर उसकी पत्नी कहां है? वो अपने बहन के अंतिम संस्कार में शामिल क्यों नही हुई? तो गांव वालों के इस अमानवीय रुख का कारण चतुरभुज का दो बार गांव की मर्जी के खिलाफ जाकर अपनी जाति के बाहर की लड़की ले साथ शादी करना है। जिसके चलते गांव वालों ने चतुरभुज का अघोषित बहिष्कार कर रखा है। और रही बात चतुरभुज के पत्नी की तो वह डायरिया से पीड़ित है और अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। मृतक महिला की मौत भी डायरिया के चलते ही हुई। ओडिशा . ओडिशा . ओडिशा . ओडिशा 

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