पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बीजेपी ने किया अजीबोगरीब ग्राफ ट्वीट

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एक तरफ जनता जहां पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त कर रही है, वहीं सरकार अपने अजीबोगरीब ग्राफ से उसी जनता को यह समझाने में लगी हुई हैं कि उनके कार्यकाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि कांग्रेस के कार्यालय की तुलना में कहीं ज्यादा कम है। हालांकि, अपने हास्यास्पद ग्राफ में सरकार जनता को यह बताना भूल गई कि कांग्रेस के कार्यकाल में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कितनी ज्यादा थी और उसकी तुलना में आज कितनी कम है। खैर, कोई राजनीतिक पार्टी खुद अपनी कमियों पर रौशनी क्यों डालेगी।

चलिए देखते है कि बीजेपी ने अपने ट्वीटर हैंडल से कल जो दो ट्वीट किए है, उसमे आखिर है क्या। बीजेपी ने कल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले 14 सालों में हुई वृद्धि को दर्शाने वाले दो अलग-अलग ग्राफ ट्वीट किए। पेट्रोल की कीमतों को लेकर बनाए गए ग्राफ में यह बताया गया कि 16 मई 2004 को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 33.71 रुपए थी, जो 16 मई 2009 को 20.5 प्रतिशत बढ़कर 40.62 रुपए हो गई। इसी तरह 16 मई 2014 को पेट्रोल की कीमत 75.8 प्रतिशत बढ़कर 71.41 रुपए हो गई। इस हिसाब से कांग्रेस के 10 सालों के शासनकाल में पेट्रोल की कीमतों में कुल 96.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और पेट्रोल के दाम 33.71 रुपए से बढ़कर 71.41 रुपए हो गए। वहीं बीजेपी के चार साल के शासनकाल में पेट्रोल की कीमतों में सिर्फ 13% की वृद्धि हुई है और पेट्रोल के दाम 71.41 से बढ़कर 80.73 हो गए।

अपने दूसरे ट्वीट में बीजेपी ने पेट्रोल की ही तरह डीजल की कीमतों में आई बढ़ोतरी की बात भी समझाई। इस ग्राफ के मुताबिक मई 2004 में दिल्ली में डीजल की खुदरा कीमत थी 21.74 रुपए जो कि 16 मई 2009 तक 42 प्रतिशत बढ़ कर हो गई 30.86 रुपए। यही कीमत 16 मई 2014 तक 83.7 प्रतिशत बढ़ कर हो गई 56.71 रुपए प्रति लीटर। इसके बाद बीजेपी के शासन में 10 सितंबर 2018 को डीजल की कीमत है 72.83 रुपए, मतलब 16 मई 2014 से इसकी मौजूदा कीमत में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जो कि पिछली सरकारों के दौरान बढ़ी कीमतों के प्रतिशत से कम है। भाजपा द्वारा ट्वीट किये गए ग्राफ में आंकड़े तो सही थे, लेकिन दो ऐसी चीजे थी जो गलत थी। पहली यह कि ग्राफ में बड़े ही हास्यास्पद तरीके से बनाया गया था, जिसमे 80.73 रूपए वालें ग्राफ को 71.41 रूपए वाले ग्राफ से छोटा बनाया गया है। इसके अलावा दूसरी गलती यह है कि इस ग्राफ में बीजेपी ने बड़ी चालाकी से यह बात छुपा दी कि मोदी सरकार के ही शासनकाल में दिल्ली में एक समय पेट्रोल 56 रूपए प्रति लिटर मिल रहा था। उस हिसाब से देखा जाए तो पेट्रोल की कीमतों में बहुत ज्यादा वृद्धि हो गई है।

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