जीका वायरस की चपेट में राजस्थान, अब तक 29 मामले आए सामने

53
निपाह वायरस के बाद आब जिका वायरस ने दस्तक दे दी है। निपाह वायरस से जहां सबसे ज्यादा केरल ग्रस्त था, वहीँ जिका वायरस के सबसे ज्यादा 29 मामले अकेले राजस्थान से आ चुके है। अब राजस्थान में जिन 29 लोगों के शरीर में जिका वायरस पाया गया है, उनमें से एक बिहार का स्टूडेंट भी है। जो राजस्थान की राजधानी जयपुर में रहकर पढाई करता है और एग्जाम देने बिहार गया हुआ था। इस बात को मद्देनजर रखते हुए बिहार सरकार भी हरकत में आ गई और राज्य से सभी 38 जिलों में जिका वायरस के लक्षणों से पीड़ित लोगों पर खास निगरानी रखने को कहा है। आपकों बता दे कि भारत के जयपुर के अलावा यह वायरस अब तक 86 देशों को निशाना बना चूका है। अब जब यह वायरस भारत में भी अपने पैर पसार रहा है, तो यह बहुत जरुरी हो गया है कि हम इस वायरस से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियां अपने पास रखे।
Image result for जीका वायरस
जीका वायरस से जुड़ा मामला कब और कहां से आया?
जीका वायरस का संबंध अफ्रीका के एक जंगल से है जिसका नाम जीका है। इस जंगल के नाम पर ही वायरस का नाम जीका रखा रखा। इस जंगल के नाम पर इसलिए क्योंकि 1947 में इसी जंगल से वैज्ञानिको को रीसस मकाक नाम का एक लंगूर जिसके शरीर में पहली बार यह वायरस पाया गया। इसके 7 साल बाद पहली बार 1954 में नाइजीरिया के एक व्यक्ति में यह वायरस पाया गया।
जीका वायरस कैसे फैलता है?
जीका वायरस भी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की ही तरह एडीज मच्छरों से फैलता है, जो दिन में सक्रिय रहते हैं। अगर यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काट लेता है, जिसके खून में वायरस मौजूद है, तो यह किसी अन्य व्यक्ति को काटकर वायरस फैला सकता है। मच्छरों के अलावा असुरक्षित शारीरिक संबंध और संक्रमित खून से भी जीका बुखार या वायरस फैलता है।
जीका वायरस के लक्षण?
जीका वायरस से संक्रमित कई लोग खुद को बीमार महसूस नहीं करते। लेकिन इसके आम लक्षण डेंगू बुखार की ही तरह होते हैं। जैसे थकान, बुखार, लाल आंखे, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और शरीर पर लाल चकत्ते।
जीका वायरस से क्या है खतरा?
यह वायरस इतना खतरनाक है कि अगर किसी गर्भवती महिला को हो जाए तो गर्भ में पल रहे बच्चे को भी यह बुखार हो सकता है। जिस वजह से बच्चे के सिर का विकास रूक सकता है और वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन भी फैल सकता है। वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन में स्किन रैशेज़ या दाग, पीलिया, लिवर से जुड़ी बीमारियां, अंधापन, दिमागी बीमारी, ऑटिज़्म, सुनने में दिक्कत और कई बार बच्चे की मौत भी हो सकती है। वहीं, वयस्कों में जीका वायरस गुलैन-बैरे सिंड्रोम का कारण बन सकता है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती हैं, इस वजह से शरीर में कई दिक्कतों की शुरुआत होती है।
Image result for जीका वायरसजीका वायरस का इलाज?
सबसे बड़ी समस्या यही है कि जीका वायरस का कोई टीका नहीं है, न ही कोई उपचार है। इस संक्रमण से पीड़ित लोगों को दर्द में आराम देने के लिए पैरासिटामॉल (एसिटामिनोफेन) दी जाती है।
जीका वायरस से बचने के लिए क्या करें?
जीका वायरस से बचने का का रामबाण इलाज इस वायरस को फ़ैलाने वाले मच्छरों को बढ़ने ही ना देना है। इसके लिए अपने आस पास पानी को ठहरने ना दे, परिसर को साफ़-सुथरा और स्वच्छ रखे। इतनी साड़ी सावधानियां बरतने के बावजूद भी मच्छर पैदा हो जाए, तो ऐसे स्थिति में मच्छरदानी का प्रयोग करें, मच्छर वाले एरिया में पूरे कपड़े पहने, मच्छरों को मारने वाली चीज़ों का इस्तेमाल करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here