क्या आप जानते हैं कि गणपति बप्पा को मोदक इतना प्रिय क्यों है?

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    वैसे तो हिंदू धर्म के सभी लोग सभी हिंदू भगवानों की पूजा करते है। लेकिन अलग-अलग राज्यों के अपने अलग-अलग पसंदीदा भगवान भी है। जैसे दक्षिण के केरल में अयप्पा की धूम है, पूर्व के बंगाल में मां काली सबकी चहेती हैंं और उत्तर भारत में सब मां शेरावाली के दीवाने है। इसी तरह भारत के पश्चिम में स्थित महाराष्ट्र में गणपति बप्पा का जादू बच्चों से लेकर बूढों तक के सिर चढ़कर बोलता हैं। महाराष्ट्र में लोग गणपति बप्पा से कितना प्यार करते है इस बात का अहसास दुनिया का कोई भी आदमी बड़ी ही आसानी से कर सकता है। उसे बस इतना करना है कि महाराष्ट्र के किसी भी कोने में जाकर सिर्फ कहना है कि गणपति बप्पा…. और इतना सुनने के बाद कहीं-न-कहीं से कोई-न-कोई ‘मोरया’ का जयकारा लगा ही देगा।
    तो अपने जिस बप्पा को महाराष्ट्र के लोग इतना पसंद करते है, वो 13 सितंबर को सभी के घरों में विराजमान हो जायेगें। एक अनुमान के मुताबिक इस साल महाराष्ट्र में गणपति बप्पा 13 हजार सार्वजनिक पंडालों में 2 लाख घरों में विराजमान होंगे। जब गणपति हमारे घरों और पंडालों में आते हैं, तब वह अकेले नहीं आते बल्कि अपने साथ सर्वप्रिय मिठाई मोदक भी लेकर आते हैं। जितना महत्व महाराष्ट्र के लिए गणेशोत्सव का हैं उतनी ही दीवानगी लोगों में मोदक को लेकर भी है। क्योंकि मोदक ही वह मिठाई है जो गणपति बप्पा को सबसे अधिक प्रिय है। और इसलिए बप्पा से प्रेम करने वाले उनके भक्त भी उन्हें मोदक का ही भोग लगाते हैं।
    यह तो हम सब जानते हैं कि गणपति बप्पा को मोदक बहुत प्रिय है, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि मोदक बप्पा को इतना प्रिय क्यों है? तो चलिए आज हम आप सभी को वह कारण बताते हैं जिसके चलते गणपति बप्पा को मोदक बहुत ज्यादा प्रिय हैं। दरअसल मोदक का शाब्दिक अर्थ होता है आनंद। और गणपति बप्पा को भी उनके हसमुख व्यवहार के लिए ही पहचाना जाता है। वैसे सिर्फ यही एक कारण नहीं है बप्पा को भोग में मोदक चढ़ाने का। क्योंकि मोदक का अर्थ भले आनंद हो लेकिन मोदक ज्ञान का प्रतीक भी होता है। और आप जानते है कि गणपति जी की पूजा हम ज्ञान के देवता के रूप में भी करते हैं।
    इस तरह दो कारण हो गए कि क्यों हम गणपति बप्पा को मोदक का भोग लगाते हैं। लेकिन अब तक हम यह नही जान पाए कि खुद गणपति बप्पा को मोदक इतना प्रिय क्यों है। दरअसल जब परशुराम जी के साथ हुए युद्ध में गणेश जी का एक दांत टूट गया था, तब उन्हें कुछ भी खाने में बहुत तकलीफ होती थीं। ऐसे में उन्हें नारियल और घी से बनाए गए मोदक खिलाया जाने लगा। अब क्योंकि मोदक मुलायम होते है तो वह गणपति बप्पा के मुंह मे झट से घुल भी जाते और उनके दांतो को जरा-सा तकलीफ भी ना होती। इसी कारण नारियल और घी से बना मोदक बप्पा का सबसे प्रिय भोजन बन गया।

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