अमेरिकी महिला का सराहनीय कदम, बदल रही है उत्तर प्रदेश में गांवों की तस्वीर

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अमेरिकी महिला का सराहनीय कदम, बदल रही है उत्तर प्रदेश में गांवों की तस्वीर
USA की एक महिला ने उत्तर प्रदेश के गांवों में अब तक 143 इको-टॉयलेट और विद्युतीकृत घर बनाया है। अब उसे आपके मदद की दरकार है। साल 2012 में अमेरिका की मूल निवासी मार्टा भारत में आकर सेटल हुईं। यहाँ आने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के गांवों में बेहतर गांव, बेहतर दुनिया (Better Village, Better World) प्रोजेक्ट के तहत काम करना शुरू किया। अब तक उन्होंने 143 लागत-कुशल इको टॉयलेट बनाया है। इसे वाष्पन-उत्सर्जन (evapotranspiration) के नाम से जाना जाता है। 10 फ़ीट चौड़ी और 122 मीटर पारगम्य सड़क तथा फ्रेंच ड्रेन है जो रेनवाटर हार्वेस्टिंग में मदद करती है।
मार्टा ने 82 इको टॉयलेट और सौर ऊर्जा से सुसज्ज घरों के लिए अपना पैसा खर्च किया। स्वच्छता स्टेटस रिपोर्ट 2016 के मुताबिक़, देश की 52.1% ग्रामीण जनसंख्या अभी भी खुले में शौच करती है। साल 2012 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश की कुल आबादी 204.2 मिलियन है और यहाँ सिर्फ़ 35% घरों में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध है।
बेहतर गांव, बेहतर दुनिया
चार साल पहले मार्टा ने उत्तर प्रदेश के एक गांव जगतपुर का सर्वेक्षण किया था। उन्होंने वहां के ग्रामीणों से पूछा कि वे अपने घरों और समुदाय के लिए क्या चाहते हैं। ज़्यादातर घरों से जवाब आया कि उन्हें टॉयलेट की जरूरत है। मार्टा का मानना है कि समय-समय पर पूछने, सुनने और निरीक्षण करने से ही इस बात की सहज जानकारी हो सकती है कि लोग क्या चाहते हैं। मार्टा विभिन्न किताबों और रिसर्च पेपर्स की सह-लेखिका भी हैं। उन्होंने विकास के लिए तीन प्रवृत्तियों वाली रणनीति भी तैयार की है जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के टुकड़े शामिल हैं।
The Logical Indian से बात करते हुए मार्टा ने बताया कि, “मेरे सिद्धांत पर आधारित, मैं एक छोटे पैमाने वाली मॉडल चाहती थी जिसे मैं निष्पादित कर सकूँ। राजीव गांधी महिला विकास परियोजना के साथ स्वयंसेवी के माध्यम से मैंने अमेठी और रायबरेली में कुछ सक्रिय सेल्फ-हेल्प समूहों को पाया। तब मैंने इसके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा सीखने, प्रैक्टिस करने और सहयोग देने का फ़ैसला किया।” मार्टा द्वारा शुरू किए गए मॉडल को Evapotranspiration कहा जाता है। इसे खुद से साफ़ किया जाता है और इसमें कम जग़ह की जरूरत पड़ती है। मार्टा और उनकी टीम ने समुदाय को एक साथ लाया और उनके द्वारा गांव में चलाए जा रहे हर प्रोजेक्ट के फ़ायदे के बारे में बताया। आज ये छोटे गांव स्वच्छता और स्वास्थ्य की महत्ता को समझते हैं। गांव के बच्चे अपने बड़ों को इको-टॉयलेट यूज करने और पास-पड़ोस को साफ़-सुथरा रखने की शिक्षा दे रहे हैं।
वाष्पन-उत्सर्जन टॉयलेट मॉडल की विशेषता
इस मॉडल के तहत बनने वाले एक यूनिट का ख़र्च 10,639 रुपए है जबकि स्वच्छ भारत अभियान के तहत एक सामान्य टॉयलेट के पीछे 17,000 रुपए ख़र्च होता है। ख़र्च को कम करने के लिए वे लोग यथासंभव टूटे ईंट और रिसाइकिल किये हुए मैटेरियल का इस्तेमाल करते हैं जिसमें ईंटों के राख और इस्तेमाल किये हुए टायर शामिल हैं। टॉयलेट का ऑपरेटिंग कॉस्ट बहुत ही कम है।
कभी कभार बैठने वाले प्लेटफॉर्म के सफ़ाई की जरूरत पड़ती है। यह घरों में इस्तेमाल किए हुए काले पानी के रासायनिक और जैविक ट्रीटमेंट और फ़िर से इस्तेमाल करने का एक ऑन-साइट सेनिटेशन सिस्टम है। यह पिछले 2-3 दशकों से US और ब्राज़ील जैसे देशों में विकसित और इस्तेमाल में लाया गया।
साथ ही, संरचना परतें बेकार पदार्थ को फ़िल्टर, रिलीज़ और अब्सॉर्ब करने के लिए अवायवीय पाचन, केशिका की कार्रवाई, वाष्पीकरण और प्रत्यारोपण प्रक्रिया का इस्तेमाल करती हैं। अवायवीय पाचन मानव मलमूत्र के एक हिस्से को बायोगैस में परिवर्तित करती है, जोकि पीछे के स्टैंडपाईप से निकल जाता है। पचा हुआ पदार्थ केशिका की कार्रवाई के दौरान बाहर निकल जाता है। पोषक तत्व खानीजिकरण के जरिए सिस्टम को छोड़ते हुए पौधों के बायोमास में शामिल हो जाते हैं और पौधों के जड़ों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। जबकि वाष्पन-उत्सर्जन द्रव को दूर करता है। द्रव दूर करने की यह प्रक्रिया या तो पौधों से भाप बनकर उड़ने या फ़िर ज़मीन के सतह पर से वाष्पीकरण के ज़रिए होता है।
इको टॉयलेट की प्रभावशीलता
1. सर्वे करने वाली टीम टॉयलेट उपयोगकर्ताओं से मिलती है। कई तरह के इस्तेमाल और प्रदर्शन सर्वेक्षण आयोजित करती है।
2. मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला, स्थानीय सरकारी अधिकारियों, अभियंताओं और टिकाऊ वास्तुकारों द्वारा टॉयलेट मॉडल की समीक्षा की गई है।
3. FICCI research and analysis सेंटर ने इको टॉयलेट से सैम्पल इकट्ठा किया औऱ सभी निर्धारित मानकों का अनुमत सीमा तक जांच किया। इन इको टॉयलेट के पास वाले हैंडपंपों के पानी में कोलीफॉर्म और ई-कोली बैक्टीरिया नहीं पाए गए।
Better Village, Better World के अंतर्गत आने वाले अन्य प्रोजेक्ट्स
1. इको टॉयलेट और सड़क बनाने के अलावा मार्टा ने घरों में 27 सोलर पैनल स्थापित किया है। जिसमें 2 लाइट और एक मोबाइल चार्जर भी है।
2. रेनवाटर हार्वेस्टिंग तकनीक के इस्तेमाल से फ्रेंच ड्रेन का निर्माण किया।
3. पारगम्य सड़कों और पीने योग्य जल के लिए माइकोफिल्ट्रेशन सिस्टम पर काम कर रही हैं।
पवन सिंह कार्यक्रम के समन्वयक हैं। सिंह ने साक्षरता कार्यक्रम, पाठ्यपुस्तक लेखन और जैविक खेती में भी मदद किया है। सिंह ने पुस्तकालयों की स्थापना, तथा चार क्लासरूम के पायलट स्टेज़ के आयोजन में भी योगदान दिया है। ‘मेरा डॉक्टर’ एक टेलिहेल्थ सेवा है जिसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसी मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराना है जिसमें 24×7 डॉक्टर से संपर्क किया जा सके। इस सुविधा को दो गांवों में साल भर तक मुफ़्त में उपहार के तौर पर दिया गया।
समुदाय का समर्थन
समुदाय ने अपना समय, जमीन और अन्य चीजें देकर इन प्रोजेक्ट्स में अपना पूरा सहयोग दिया। मार्टा और उसके अनुयायी उन्हीं वर्करों और राजमिस्त्रियों के साथ काम करते हैं। वे यह समझते हैं कि कैसे इको टॉयलेट काम करता है। इसी कार्यप्रणाली को वे नए घरों को समझाते हैं। बिना पर्याप्त सहयोग और संसाधन के मार्टा ने बिना किसी स्वार्थ के अविश्वसनीय काम किया है। अब वह चाहती हैं कि हम उनके इस प्रयास से जुड़ें।
इन प्रोजेक्ट्स के ज़्यादा जानकारी के लिए मार्टा से martavanduzersnow@gmail.com पर जुड़ें।

साभार- The Logical Indian

अनुवादक- श्रवण पांडेय

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