अगले पांच सालों में भारतीय सेना में 1.5 लाख नौकरियों की हो सकती है कटौती

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एक तरफ तो सरकार सेना के नाम पर अपनी कई योजनाओं से जनता को होने वाले जानलेवा कष्ट से कवर कर रही है और वहीं दूसरी तरफ खबर आती है कि भारतीय सेना में डेढ़ लाख जवानों की कटौती करने पर विचार चल रहा है। कहने का मतलब एक तरफ देश में पहले से ही नौकरियों को अकाल चल रहा है और उसपर से अब अगले पांच सालों में भारतीय सेना से डेढ़ लाख नौकरियां खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है। जैसा कि हर सरकारी फैसले के पीछे कोई न कोई कथित वाजिब कारण बताया जाता है, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेना में आगामी पांच सालों में 1.5 लाख नौकरी खत्म करने से पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि इससे सेना को लगभग 7000 करोड़ की बचत होगी।

1.5 लाख लोगों की नौकरियां खाकर सरकार जो 7000 करोड़ रुपए की बचत करेगी, उसे सेना के लिए नए एडवांस हथियार और उपकरण खरीदने में खर्च करेगी। सेना के अधिकारियों के अनुसार सेना बलों में कटौती क्षेत्र के हर विभाग से की जाएगी। इनमें आर्मी मुख्यालय, सैन्य मुख्यालय निदेशालय, रणनीतिक प्रभाग, संचार अवस्थापना, मरम्मत विभाग, प्रशासनिक विभाग और सहायक क्षेत्र शामिल हैं। लेफ्टिनेंट जनरल की अगुआई में इस पर अध्ययन करने के लिए बाकायदा 25 लोगों की टीम भी बनाई गई है। इसका मुख्य काम यह देखना और तय होगा कि कैसे कुछ निदेशालयों को मिलाकर एक निदेशालय बनाया जा सकता है। ज्ञात हो कि भारतीय आर्मी के संचालन के लिए सालाना बजट से वर्तमान में आवंटित हुए 1.2 लाख करोड़ रुपए के बजट में से 83% रकम तो अकेले राजस्व व्यय और वेतन जैसी मूलभूत चीजों पर खर्च हो जाया करती है। और अगर इसमे सेना से रिटायर्ड हो चुके जवानों को मिलने वाली पेंशन पर होने वाले खर्च को भी जोड़ दे तो रकम और भी कम हो जाएगी।
इस तरह भारतीय सेना को मिला जुलाकर सिर्फ 26 हजार करोड़ ही मिलते है सेना को सुसज्जित करने हेतु आवश्यक उपकरण और हथियारों को खरीदने के लिए। अब अगर अगले पांच सालों में 1.5 लाख जवानों की नौकरी खत्म कर दी जाएगी तो इससे सेना को सालाना करीब 7000 करोड़ की बचत होगी। इससे होगा यह कि हथियार और उपकरण खरीदने के लिए सेना का बजट बढ़कर 33 हजार करोड़ हो जाएगा। भारतीय सेना के लिए नए और अत्याधुनिक हथियार और उपकरण इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके जरिए हम दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना को हल्का और सार्थक बना सकते हैं। फ़िलहाल सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल जेएस संधू के नेतृत्व वाली 11 सदस्यीय पैनल ने पूरे मामले की समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है कि पैनल इस महीने के आखिर में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को सौंपेगी। जबकि अंतिम रिपोर्ट नवंबर तक आने की उम्मीद है।

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