अगर पहला घंटा बिना विकेट के निकल गया तो मैच निकाल लेगा भारत

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अगर पहला घंटा बिना विकेट के निकल गया तो मैच निकाल लेगा भारत
तीसरे दिन के खेल के खत्म होने के बाद अब यह तय हो गया है कि पहले टेस्ट मैच का कोई न कोई नतीजा निकलेगा ही। लेकिन जिस तरह की स्थिति है उसमें यह कह पाना बेहद मुश्किल है कि नतीजा किसके पक्ष में और किसके खिलाफ आएगा। क्योंकि पहली इनिंग के दमपर इंग्लैंड को जो 13 रनों की मामूली बढ़त मिली थी। उसमें पूरी इंग्लैंड टीम मिलकर भी दूसरी पारी में सिर्फ 180 रन ही अतिरिक्त जोड़ पाई। नतीजतन भारत को जीतने के लिए 194 रन का साधारण लक्ष्य मिला। लेकिन शुरुआत में साधारण नजर आ रहा यह लक्ष्य तब पहाड़ जैसा लगने लगा जब भारत ने अपने 5 अहम विकेट सिर्फ 78 रन पर गवां दिए। हालांकि, कोहली एक छोर पर खड़े रहकर अब तक भारत की उम्मीदों को जिंदा रखे हुए है।
तीसरे दिन की शुरूआत में ही अश्विन ने अपनी फिरकी के फंदे में जेंनिंग को फंसाकर इंग्लैंड को दिन का पहला और कुल दूसरा झटका देकर बैकफुट पर ढकेल दिया। जेंनिंग के आउट होने के बाद इंग्लैंड के बल्लेबाजों की कहानी ‘आया राम गया राम’ वाली हो गई। सैम काररून को छोड़ दे तो भारतीय गेंदबाजों के सामने इंग्लैंड का कोई भी बल्लेबाज ज्यादा देर तक क्रीज पर टिक नही पाया। सैम ने अकेले दमपर 65 गेंदों का सामना करते हुए तूफानी अंदाज में 63 रनों की दर्शनीय पारी खेली।
भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के आगे इंग्लिश बल्लेबाज इतने बेबस नजर आए कि 87 रन के स्कोर पर ही उसके सात बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। वो तो भला हो सैम का जिन्होंने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर किसी तरह टीम का स्कोर 180 तक पहुंचाकर मुकाबले को कांटेदार बना दिया। बाकी इंग्लिश बल्लेबाजों की खटिया खड़ी करने में सबसे अहम भूमिका इशांत शर्मा ने निभाई। उन्होंने सिर्फ 51 रन खर्च करके 5 इंग्लिश बल्लेबाजों को पवेलियन की ओर चलता किया। उधर अश्विन और उमेश ने भी क्रमशः 3 और 2 विकेट चटकाकर इंग्लैंड की पारी को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
इंग्लैंड को 180 रन पर समेटने के बाद जीत के लिए मिले 194 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद भयावह रही। 19 रन के स्कोर पर पहला विकेट गवांने के बाद बजाय संभलने के भारत ने 22 रन पर अपना दूसरा विकेट भी खो दिया। सिर्फ 22 रन के स्कोर पर मुरली विजय और शिखर धवन इन दोनों सलामी बल्लेबाजों को गवां देने के बाद भारतीय टीम को बड़े संकट की अग्रिम सूचना मिल गई। और जब 78 रन तक पहुंचते-पहुंचते आधी भारतीय टीम आउट होकर मैदान से बाहर चली गई। तब लगा कि सर पर मंडरा रहे हार के बादल कभी भी बरस सकते है।
ऐसे विकट स्थिति में संकट मोचक के रूप में एक बार फिर भारतीय कप्तान विराट कोहली मैदान पर डटे रहे और मुश्किल हालातों के बावजूद मैच के भारत की उम्मीदों को जैसे-तैसे बनाए रखा। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक कप्तान कोहली ने दिनेश कार्तिक के साथ मिलकर 6वें विकेट के लिए बहुमूल्य 32 रन जोड़कर टीम का स्कोर 110 तक पहुंचा दिया। तीसरे दिन की समाप्ति पर एक छोर पर विराट 43 रन बनाकर और दूसरे छोर पर दिनेश कार्तिक 18 रन बनाकर नाबाद खड़े थे। चौथे और निर्णायक दिन जब भारत को जीत के लिए 84 रन और इंग्लैंड को जीत के लिए 5 विकटों की जरूरत होगी। तब इस जोड़ी का प्रदर्शन और दिन का पहला घंटा बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि अगर भारत ने दिन का पहला घंटा बिना कोई विकेट गवांए निकाल लिया। तो समझो भारत ने मैच निकाल लिया।

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